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राष्ट्रीय जल अकादमी
उत्कृष्टता के लिए प्रशिक्षण (ट्रेनिंग फॉर एक्सीलेंस)
Ashok Pillar


राष्ट्रीय जल अकादमी में संकाय

राष्ट्रीय जल अकादमी में स्थायी संकाय का चयन केन्द्रीय जल आयोग द्वारा चुनिंदा एवं विशिष्ट केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह-‘क’ अधिकारियों, जिनका उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड, जल संसाधन विकास और प्रबंधन में लंबे व्यावहारिक अनुभव और योग्यता के साथ प्रशिक्षण देने के लिए अच्छा संचार कौशल होना शामिल है, से किया जाता है |

स्थायी संकाय एक मुख्य अभियंता के नेतृत्व में आठ संकाय के रूप में जल विज्ञान एवं जल संसाधन, सिंचाई, जल विद्युत, सामाजिक आर्थिक एवं पर्यावरणीय पहलु तथा तन्त्र अभियान्त्रिकी जैसे विशेष विषयों को आवरित करने के लिए है | राष्ट्रीय जल अकादमी में शामिल स्थायी संकाय केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह-‘क’ वर्ग के अधिकारी है जिन्हे जल के क्षेत्र में पर्याप्त पेशेवर / क्षेत्रिय अनुभव है |

स्थायी संकाय के अलावा, पाठ्यक्रम का समर्थन राष्ट्रीय जल अकादमी द्वारा आमंत्रित अतिथि संकाय द्वारा किया जाता हैं | अतिथि संकाय में प्रमुख अनुसंधान केन्द्रों और भारत के विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों के साथ-साथ अन्य संगठनों / संस्थाओं / विभागों / गैर सरकारी संगठनों में अभ्यासरत पेशेवरों और विशेषज्ञों, जिसमें सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी भी होतें है, को शामिल किया जाता है |

राष्ट्रीय जल अकादमी में स्थायी संकाय

राष्ट्रीय जल अकादमी के स्थायी संकाय में शामिल है:-

डॉ. शैलेश कुमार श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता

डॉ. शैलेश कुमार श्रीवास्तव भारत वैगन इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बाद संघ लोक सेवा आयोग अभियान्त्रिकी सेवाओं के माध्यम से 1982 में केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा (CWES) में शामिल हो गए | उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना से 1980 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग से अभियान्त्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की | अभियान्त्रिकी के पेशे में उन्होंने जल संसाधन के क्षेत्र में एक विशेष रुचि विकसित की और 1987 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से जल संसाधन विकास (सिविल) अभियान्त्रिकी परास्नातक की उपाधि विशेषज्ञता के साथ प्राप्त की | तत्पश्चात, उन्हे उत्कल विश्वविद्यालय द्वारा व्यवसाय प्रबंधन में डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया गया |

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केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा में अपने पेशेवर कार्यकाल में उन्होंने केन्द्रीय जल आयोग, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और जल संसाधन मंत्रालय के विविध क्षेत्रों, योजना और सिंचाई के डिजाइन, बाढ़ नियंत्रण, जल विद्युत परियोजनाओं और बहुउद्देशीय परियोजनाओं के पहले चरण में एवं उनके मूल्यांकन और निगरानी सहित कई पदों में काम किया है | इन्हे जल गुणवत्ता प्रबंधन में भी अनुभव है | अंर्तराष्ट्रीय स्तर में उन्होंने जंजीबार सरकार के लिए सिंचाई और जल प्रबंधन में आईटीईसी विशेषज्ञ के रूप में दो साल से अधिक कार्य किया | इन्होंने अंर्तराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मंचों पर कई लेखों का योगदान दिया है | इन्होंने वर्ष 2009 में कुआलालंपुर (मलेशिया) में यूनिसेफ के कार्यशाला बाढ़ जोखिम प्रबंधन एवं वर्ष 2014 में बैंकॉक, थाईलैंड में आईयूसीएन कार्यशाला 'गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली में हाइड्रो-कूटनीति पर पाठ्यक्रम विकास" में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व किया है | इन्होने विभिन्न सेमिनार और सम्मेलनों में अनेक सत्रों की अध्यक्षता भी की है |

यद्यपि वर्तमान में वे राष्ट्रीय जल अकादमी के मुख्य अभियंता के रूप में काम कर रहे है, परंतु उनके व्याख्यान का क्षेत्र जल संसाधनों के विकास और प्रबंधन के कई पहलु पर है | इनके दिलचस्पी के क्षेत्र में योजना, डिजाइन और पन-बिजली, सिंचाई एवं बहुउद्देशीय परियोजनाओं, जल गुणवत्ता प्रबंधन एवं मूल्यांकन; जल संसाधन क्षेत्र की नीति के मुद्दों के साथ-साथ गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र जैसे ज्वार ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा विकास इत्यादि शामिल हैं | इसके अलावा ये जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के विभिन्न समिति जैसे "जल संसाधन मंत्रालय की बारहवीं योजना के जल संसाधन कार्य समूह", "आपदा प्रबंधन टास्क फोर्स" के सदस्य भी रहे हैं | वे इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) एवं इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट (ISTD) आदि के साथ सक्रिय रूप से जुड़े है | फलस्वरूप, इन्हे वर्ष 2000 में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) द्वारा आजीवन फैलोशिप एवं वर्ष 1986 में इंडियन सोसाइटी फॉर ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट (ISTD) की आजीवन सदस्यता से सम्मानित किया गया है |

संपर्क:

+9120-24380678 (कार्यालय)
+9120-24380110 (फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, cwc.srivastava@gmail.com

सुशील कुमार, निदेशक

सुशील कुमार ने वर्ष 1986 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में प्रौद्योगिकी स्नातक किया है | वे वर्ष 1990 में भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के अधीन केन्द्रीय जल आयोग के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी (ग्रुप 'ए') सेवा (CWES-Group ‘A’) में बतौर सहायक निदेशक शामिल हो गए | इन्होने केन्द्रीय जल आयोग, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण, गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग, जल संसाधन मंत्रालय, सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति और राष्ट्रीय जल अकादमी र्इत्यादि के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया है | केन्द्रीय जल आयोग में शामिल होने से पहले उन्होने एक बंदरगाह परियोजना के डिजाइन और निर्माण के बहु-राष्ट्रीय परामर्शक अभियंताओं के साथ काम किया है |

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सुशील कुमार का सिविल अभियान्त्रिकी के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक पेशेवर अनुभव है | केन्द्रीय जल आयोग में उनके अनुभवों में महत्वपूर्ण विश्लेषण और डिजाइन कार्य, जल विज्ञान संबंधी टिप्पणियों, बाढ़ पूर्वानुमान एवं इससे संबंधित मुद्दे, केन्द्रीय योजना स्कीमों के कार्यान्वयन, मानव संसाधन प्रबंधन र्इत्यादि शामिल हैं |

नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण में उन्हे पुनर्वास और पुनर्स्थापन के कार्यान्वयन के लिए योजना की तैयारी, पुनर्वास नीति, पर्यावरण प्रभाव आकलन एवं सरदार सरोवर बहुउद्देशीय परियोजना के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्य की प्रगति की निगरानी के साथ शामिल किया गया था | अलावा इसके, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण सचिवालय, जहां सीधी भर्ती के साथ प्रतिनियुक्ति के आधार पर भी नियुक्ति होती है, के दिन-प्रतिदिन के प्रशासनिक जरूरतों की देखभाल करते हुए प्रशासन स्कंध इनकी जिम्मेदारियों का एक हिस्सा था |

राष्ट्रीय जल अकादमी में अपने पहले कार्यकाल के दौरान सुशील कुमार ने जल संसाधन विकास और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम जिसमें महत्वपूर्ण मुद्दों, रचना स्वरूप, बांध सुरक्षा के मुद्दों सहित प्रबंधकीय और संचार कौशल, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण की तैयारी एवं आयोजन किया था | वे बाढ़ प्रबंधन, रचना स्वरूप, जल विज्ञानीय प्रेक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, सामरिक मुद्दों से प्रभावी संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास जैसे विभिन्न विषयों के लिए संकाय भी रह चुके हैं | अलावा इसके, वे राष्ट्रीय जल अकादमी में विश्व बैंक सहायता प्राप्त जल विज्ञान परियोजना-द्वितीय (HP-II) का कार्यान्वयन नियन्त्रित किया है | इन्होने राष्ट्रीय जल अकादमी के निदेशक (प्रशासन एवं समन्वय) का दायित्व भी बखुबी निभायी है |

जल संसाधन मंत्रालय की ब्रह्मपुत्र और बराक स्कंध में वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त के रूप में सुशील कुमार ने परियोजना समन्वय सचिवालय एवं परियोजना समन्वय सचिवालय के लिए तकनीकी सहायता और प्रबंधन परामर्श के कार्यों की देखरेख के साथ-साथ विश्व बैंक सहायता प्राप्त जल विज्ञान परियोजना-द्वितीय के देश भर में विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच क्रियान्वयन की देखरेख भी की है |

'अपने कार्यालय के प्रमुख' के रूप में वडोदरा में सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति सचिवालय चलाने के अलावा सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति में सुशील कुमार ने यूनिट I (बांध और आनुषंगिक कार्य) और यूनिट-III (पन बिजली का कार्य) की प्रगति की निगरानी, गरूड़ेश्वर बॉंध के निर्माण की निगरानी के साथ-साथ इन निर्माण कार्यों से संबंधित किसी भी मुद्दे पर पार्टी राज्यों के मध्य समन्वय स्थापित करने में भी शामिल रहे हैं | पार्टी राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना की लागत के हिस्सेदारी का वितरण अपने समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी उनको उत्तराधिकार के रूप में मिला था | सुशील कुमार ने सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति में अपने कार्यकाल के दौरान लगभग सात महीने के लिए सचिव, सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति एवं विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी भी ली । उनके इस कार्यकाल के दौरान लंबे समय से ठप पड़े बांध निर्माण को फिर से शुरू किया गया था |

संपर्क:

+91-020-24380144(कार्यालय) +91-9422646384 (मोबार्इल)
+91-020-24380110/24380224(फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, sushilkumar_cwc@yahoo.co.in

द. सो. चासकर, निदेशक

द. सो. चासकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई से "डिजाइन अभियान्त्रिकी" में स्नातकोत्तर है | वे केन्द्रीय जल आयोग के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी (समूह-ए) सेवा में बतौर सहायक निदेशक वर्ष 1991 में शामिल हुए | तब से उन्होने केन्द्रीय जल आयोग के विभिन्न निदेशालयों में सहायक निदेशक / उप निदेशक की क्षमता से काम किया है | सहायक निदेशक के रूप में वे जल संसाधन परियोजनाओं की लागत मूल्यांकन के साथ जुड़े रहे | हाइडल सिविल डिजाइन निदेशालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जल संसाधन संरचनाओं के डिजाइन में उन्नत तकनीकों एवं कंप्यूटर के उपयोग पर काम किया है |

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इन्हे फाटकों, उत्थापकों एवं जल संसाधन परियोजनाओं के अन्य जल-यांत्रिक उपकरणों के डिजाइन में पेशेवर अनुभव है | इन्होंने काफी कई परियोजनाओं के लिए योजना बनाने और जल-यांत्रिक उपकरणों के डिजाइन का प्रबंध भी किया है | कम्प्यूटर सहायताप्राप्त डिजाइन के प्रयोग, विशेष रूप से परिमित तत्व विधि (Finite Element Method) और जलीय संरचनाओं के लिए इसके प्रयोग में इन्होने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | वे एकीकृत डिजाइन और इंजीनियरिंग विश्लेषण सॉफ्टवेयर (IDEAS) एवं कम्प्यूटर सहायताप्राप्त डिजाइन (CAD) तथा परिमित तत्व विधि (Finite Element Method) जैसे अन्य सॉफ्टवेयर के साथ परिचित एवं दक्ष है |

तकनीकी समन्वय निदेशालय में बतौर उप निदेशक इन्होंने अध्यक्ष के तकनीकी कार्यों के लिए ऑंकड़ा आदान-प्रदान करने का उत्तरदायित्व संभाला था | केन्द्रीय जल आयोग के वार्षिक रिपोर्ट का संकलन एवं प्रकाशन, विदेशी प्रतिनिधियों की यात्राओं का समन्वय, संसद समितियों से संबंधित मामले एवं संगठनात्मक मुद्दे र्इत्यादि भी इनके उत्तरदायित्व में सम्मिलित थे |

राष्ट्रीय जल अकादमी में इन्होंने एक स्थायी संकाय और पाठ्यक्रम समन्वयक के रूप में अपने सामान्य कर्तव्यों के अलावा बतौर उप निदेशक (प्रशासन एवं समन्वय) एवं निदेशक (प्रशासन एवं समन्वय) के रूप में, सामान्य प्रशासन, स्थापना, लेखा, अनुबंध, ढांचागत विकास, एवं राष्ट्रीय जल अकादमी परिसर के संरक्षण एवं रखरखाव के जटिल कार्य को भी संभाला है | कार्यालय भवनों, एनेक्सी भवन, अतिथि गृह, तरण ताल, नई कृष्णा अतिथि गृह, जॉगिंग ट्रैक र्इत्यादि के निर्माण जैसे ढांचागत विकास के मामले में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है | वे ऐसे अधिकारियों में से है जिनका नर्इ राष्ट्रीय जल अकादमी परिसर की स्थापना एवं परिचालन में सभी रसद और सेवाओं के साथ महत्वपूर्ण योगदान रही है ।

राष्ट्रीय जल अकादमी में वे जल संसाधन संरचनाओं, परिमित तत्व विश्लेषण, जल विज्ञान सूचना प्रणाली के साथ-साथ जल विज्ञान परियोजना के तहत विकसित सतही जल ऑंकड़ा प्रविष्टी प्रणाली (SWDES), जलीय मॉडलिंग प्रणाली ( HYMOS), जल सूचना प्रणाली के लिए आंकड़ों का ऑनलाइन प्रबंधन (WISDOM ), सॉफ्टवेयर के उपयोग, कमान क्षेत्र विकास, सहभागितापूर्ण सिंचाई प्रबंधन आदि विशिष्ट क्षेत्रों के पाठ्यक्रमों का समन्वय किये है | स्थायी संकाय के रूप में उनके द्वारा संभाले जा रहे विषयों में जल संसाधन क्षेत्र में प्रयुक्त सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, परिमित तत्व विधि (Finite Element Method) मॉडलिंग, हाइड्रो-यांत्रिक उपकरणों और जल विद्युत संरचनाओं के डिजाइन, सतही जल ऑंकड़ा प्रविष्टी प्रणाली (SWDES), जलीय मॉडलिंग प्रणाली ( HYMOS), जल सूचना प्रणाली के लिए आंकड़ों ऑकड़ों का ऑनलाइन प्रबंधन (WISDOM ) आदि शामिल है | वे विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के सहयोग से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन भी करते है |

संपर्क:

+91-020-24380224 (कार्यालय)
+91-020-24380110(फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, dschaskar@yahoo.com

सुनील कुमार, निदेशक

सुनील कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 1997 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr.’A’) अधिकारी है | इन्होंने एम एस बिरला इंस्टीट्यूट, मेसरा से प्रौद्योगिकी अभियान्त्रिकी (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) स्नातक एवं यूरो एक्वा, जो 5 यूरोपीय विश्वविद्यालय का एक संघ है, से जल सूचना विज्ञान एवं जल प्रबंधन से विज्ञान निष्णात (M.S.) की उपाधि प्राप्त की | अपने निष्णात पाठ्यक्रम की लक्ष्य प्राप्ती हेतु इरास्मस मुन्दुस (Erasmus Mundus) छात्रवृत्ति के लिए यूरोपीय आयोग द्वारा 28 विश्व स्तर पर चयनित छात्रों में एक थे | इन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से परियोजना प्रबंधन (PGCPM) में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र भी किया है |

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इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग के निर्माण मशीनरी कंसल्टेंसी निदेशालय में सहायक निदेशक / उप निदेशक पद पर रहते हुए तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन, जल संसाधन परियोजना हेतु उपकरण नियोजन के दृष्टि से तकनीकी परामर्श एवं संयंत्र निर्माण उपकरण कार्यप्रणाली की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया | इन्होंने इन क्षेत्रों में मानदंडों, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण विकसित करने में अपना योगदान दिया।

जल संसाधन मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास प्रभाग में उप निदेशक के रूप में काम करते हुए इन्होने अनुसंधान और विकास के दिशा-निर्देशों के संकलन, सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से पानी के क्षेत्र में अनुसंधान पर रिपोर्ट (पीपीपी), योजना स्कीम के व्यय के लिए वित्त समिति (ईएफसी) ज्ञापन, जल प्रबंधन के लिए एक एकीकृत रणनीति विकसित करने के लिए मंत्रियों के समूह (जीओएम) को सहायता, भारतीय राष्ट्रीय समितियों और बारीकी से परियोजनात्तर निष्पादन मूल्यांकन अध्ययन, जल उपयोग दक्षता अध्ययन, जल संसाधन मंत्रालय आदि के संगठनों द्वारा किए गए अनुसंधान एवं विकास लिए कार्य के मूल्यांकन र्इत्यादि के रूप में कई अनुसंधान प्रयासों में योगदान दिया है | इसके अलावा पहले निदेशक के रूप में इन्होने 'सतही जल पर भारतीय राष्ट्रीय समिति' (INCSW) की नवगठित सचिवालय जो सिंचाई एवं जलनिस्सारण पर अंर्तराष्ट्रीय आयोग की राष्ट्रीय समिति (आईसीआईडी) भी है, के सभी गतिविधियों को कार्यात्मक बनाया है |

सुनील कुमार की अच्छा अंतरराष्ट्रीय पहुंच है तथा इन्होने वार जलग्रहण क्षेत्र की बाढ़ विश्लेषण, नाइस, फ्रांस (हाइड्रो-यूरोप), अबिंगडॉन (संयुक्त राज्य) के लिए शहरी बाढ़ पूर्वानुमान हेतु प्रारंभिक अध्ययन, विदा नदी, डेनमार्क के मॉडलिंग पर वेब सहयोगात्मक अध्ययन (Hydro-Web) तथा कई अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी / सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग लिया है |

जल संसाधन परियोजना के निर्माण उपकरण पद्धति, जल क्षेत्र में अनुसंधान, जल प्रबंधन के उभरते अवधारणाये, जलसूचना विज्ञान उपकरण जैसे ArcGIS, Mike-11, Mike-She, Mike-21, Mike-Mouse, HEC RAS, HEC HMS, इन्फोवर्कस, CS/RS /2D, न्यूरोसेल, एस्पानेट, Water CAD र्इत्यादि इनके दिलचस्पी के क्षेत्रों में शामिल है |

संपर्क:

+91-020-24380296 (कार्यालय)
+91-020-24380110 (फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, sunil701@yahoo.com

प्रदीप कुमार, निदेशक

प्रदीप कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2000 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr.’A’) अधिकारी है | इन्होंने जुलाई 2003 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में योगदान किया | इन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज, कोटा (अब आरटीयू, कोटा, राजस्थान) से यान्त्रिक अभियान्त्रिकी से स्नातक की उपाधि एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से थर्मल अभियान्त्रिकी से प्रौद्योगिकी निष्णात की उपाधि प्राप्त की है |

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केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नर्इ दिल्ली में अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने प्रगति एवं आयोजना (उत्तर एवं दक्षिण) निदेशालय, सॉफ्टवेयर प्रबंधन निदेशालय, फाटक (उत्तर एवं पश्चिम) निदेशालय एवं निर्माण मशीनरी परामर्श निदेशालय में सहायक निदेशक और उप निदेशक के रूप में काम किया है |

इनके द्वारा संभाले गये कार्यों की प्रकृति में DPR (बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं) के मूल्यांकन के लिए समन्वय एवं टीएसी टिप्पणी की तैयारी, सॉफ्टवेयर / हार्डवेयर की खरीद और प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन एवं प्रबंधन, जल-यान्त्रिक कार्य (हाइड्रोलिक फाटक एवं उत्तोलक) के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की जॉंच, हाइड्रोलिक फाटक, उत्तोलक के विभिन्न प्रकार के तकनीकी विनिर्देश विनिर्माण रेखाचित्रों, जल संसाधन परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले गैन्ट्री क्रेन र्इत्यादि की जॉंच एवं जल संसाधन परियोजनाओं के लिए हाइड्रोलिक फाटक, उत्तोलक के तकनीकी विनिर्देश दस्तावेज़ एवं रेखाचित्रों की तैयारी र्इत्यादि शामिल हैं |

राष्ट्रीय जल अकादमी में इनका कर्तव्य जल संसाधन विकास में सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आरएस / जीआईएस उपकरण आदि के संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन एवं समन्वय करने से है |

DPR (बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं) का मूल्यांकन, अधोलंब हाइड्रोलिक फाटकों (फिक्स्ड पहिया, स्लाइड), लॉग रोक, यान्त्रिक उत्तोलक, गैन्ट्री क्रेन र्इत्यादि जल यान्त्रिक उपकरणों, जल संसाधन परियोजनाओं के निर्माण उपकरण और संयंत्र के डिजार्इन निर्माण, क्वॉनटम भू सूचना प्रणाली, भौगोलिक संसाधन विश्लेषण समर्थन प्रणाली, सागा (SAGA), HEC RAS, HEC HMS, ऑटोकैड, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, सी, सी ++, Visual C ++, विन्डो प्रोग्रामिंग, डिवाइस ड्राइवर प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेअर का परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण र्इत्यादि जल सूचना विज्ञान उपकरणों के उपयोग के क्षेत्र में इन्हे विशेषज्ञता हासिल है |

संपर्क:

+91-020-24380528 (कार्यालय)
+91-020-24380110 (फैक्स)
र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in

सिद्धार्थ मित्रा, निदेशक

सिद्धार्थ मित्रा, निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2002 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr. ‘A’) अधिकारी है | इन्होंने सितंबर, 2004 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में योगदान किये एवं इनकी तैनाती केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, नर्इ दिल्ली में की गयी | इन्होंने यादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता से अभियान्त्रिकी स्नातक (सिविल अभियान्त्रिकी) एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से परिवहन अभ्यान्त्रिकी में प्रौद्योगिक निष्णात की उपधि प्राप्त की | इन्हे स्नातकोत्तर स्तर पर सिविल अभियान्त्रिकी में समग्र अव्वल होने के लिए रजत पदक से सम्मानित किया गया |

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उप निदेशक (पनबिजली) के रूप में राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे स्थानांतरित किए जाने से पहले जून 2015 तक वे थर्मल सिविल डिजाइन मंडल, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण में तैनात थे | केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, नर्इ दिल्ली में रहते हुए अप्रैल, 2008 इन्हे उप निदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया तथा जून, 2016 में इनकी पदोन्नति निदेशक पद पर हो गयी |

थर्मल सिविल डिजाइन मंडल, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, नर्इ दिल्ली में रहते हुए इनक द्वारा संभाले मुख्य कार्य थर्मल पावर परियोजनाओं और प्रसारण लाइनों की डिजाइन एवं अभियान्त्रिकी, जल विद्युत परियोजनाओं के मात्रा आकलन एवं चरणबद्ध सिविल लागत की जॉंच, फ्लाई ऐश उत्पादन की निगरानी एवं देश में उपयोग, पनबिजली परियोजनाओं के भुमिगत बिजलीघर के वैद्युतिक ओवरहेड भारोत्तोलन यंन्त्र के डिजाइन एवं अभियांन्त्रिकी एवं अत्यंत विशाल बिजली परियोजनाओं के जल की उपलब्धता और जल निकासी क्षेत्र के रिपोर्ट की जॉंच रही है |

संपर्क:

+91-020-24380296 (कार्यालय)
+91-020-24380110 (फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in

अरिफुल्ला बैग, उप निदेशक

अरिफुल्ला बैग, उप निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 1981 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (CWES) अधिकारी है | वे अक्तुबर, 1986 में वेनगंगा मंडल, केन्द्रीय जल आयोग, नागपुर के अन्तर्गत मेडापल्ली कार्यस्थल, महाराष्ट्र राज्य में कनिष्ठ अभियंता के रूप में शामिल हुए | वे सिद्धगंगा प्रौद्योगिकी संस्थान, तुमकुर, कर्नाटका से सिविल अभियान्त्रिकी से अभियान्त्रिकी स्नातक है |

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केन्द्रीय जल आयोग में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कनिष्ठ अभियंता से लेकर उप निदेशक तक विभिन्न पदों में काम किया है |

इन्होने जल विज्ञानीय प्रेक्षण, उपमंडल तथा उपमंडल के अधीन कार्यस्थलों के रख-रखाव एवं जल विज्ञानीय ऑंकड़ा संकलन, बाढ़ पूर्वानुमान बुलेटिन तैयार कर और उपयोगकर्ता एजेंसियों को हस्तांतरित करना, नदियों को आपस में जोड़ने तथा राष्ट्रीय जल आयोजना निदेशालय के अन्य कार्य, आंध्र प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन, प्रबोधन एवं मूल्यांकन निदेशालय, केन्द्रीय जल आयोग, हैदराबाद के आदान एवं संवितरण अधिकारी का कार्य, मंडल कार्यालय का रखरखाव एवं कृष्ण और पेन्नार घाटियों के बाढ़ पूर्वानुमान, राष्ट्रीय जल अकादमी के आदान एवं संवितरण अधिकारी के साथ-साथ स्थायी संकाय का कार्यभार संभाला है | वर्तमान में वे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की संरचना एवं आयोजन तथा राष्ट्रीय जल अकादमी में आयोजित अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान व्याख्यान देना, निविदा जारी करना तथा राष्ट्रीय जल अकादमी के प्रशासन एवं समन्वय स्कंध की निगरानी से जुडे हैं |

इन्होने विभिन्न संगठनों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी की है | वर्ष 2015 के दौरान इन्हे दिनांक 17/02/2015 से 14/04/2015 तक के अवधि के लिए हार्डिंग ब्रिज (बांग्लादेश) में संयुक्त जल विज्ञानीय प्रेक्षण के लिए भारतीय टीम के एक सदस्य के रूप में चयनित किया गया था |

राष्ट्रीय जल अकादमी में वे आदान एवं संवितरण अधिकारी के साथ-साथ केन्द्रीय जल आयोग के सहायक निदेशक-2 / उपमंडल अभियंताओं के अभिविन्यास प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं अन्य संबंधित कार्यक्रमों का समन्वय एवं संचालन के कार्य का दायित्व पालन कर रहें हैं |

इन्हे बाढ़ पूर्वानुमान एवं जल विज्ञानीय ऑंकड़ा एवं बाढ़ पूर्वानुमान बुलेटिन तैयार करने तथा ध्वनिक डॉपलर प्रवाह प्रोफाइलर (ADCP) द्वारा प्रवाह नापने की विशेषज्ञता हासिल हैं |

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मनीष राठौर, उप निदेशक

मनीष राठौर, उप निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी एक 2007 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr. ‘A’) अधिकारी है | वे जुलार्इ, 2009 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नर्इ दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुये | वे जी.एस. प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर से सिविल अभियान्त्रिकी में अभियान्त्रिकी स्नातक तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई से संरचनात्मक अभियान्त्रिकी में प्रौद्योगिकी निष्णात है |

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इन्हे स्नातक स्तर पर सिविल अभियान्त्रिकी में समग्र अव्वल होने के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया | वर्ष 2009 में सिविल अभियान्त्रिकी में अभियान्त्रिकी निष्णात में समग्र अव्वल होने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुम्बई हेरिटेज फन्ड छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया | इन्होने वर्ष 2012 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से नवोन्मेष और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण फाउंडेशन (FITT) के तहत "भूमिगत संरचनाओं के विश्लेषण एवं डिजाइन" विषय पर 3 क्रेडिट कोर्स तथा "जल विद्युत अभियान्त्रिकी" पर एक 4 क्रेडिट कोर्स में सहभागिता की |

हाइडल सिविल डिजाइन (उत्तर एवं उत्तर-पूर्व) निदेशालय में अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान डिजाइन टीम के एक प्रमुख सदस्य के रूप में इन्होने जल विद्युत परियोजनाओं के विभिन्न घटकों के डिजाइन और अनुकूलन का काम किया है | परियोजना के नक्शा अनुकूलन, विश्लेषण, डिजाइन और जल विद्युत परियोजनाओं के विभिन्न घटकों की विस्तृत परियोजना रिर्पोट / निविदा / निर्माण चरण के रेखांकन में इनका योगदान रहा है | ट्रांसिएंट एनालिसिस, लेआउट ऑप्टिमाइजेशन, प्रेशर शाफ़्ट डिजाइन, बाईफरकेशन पीस डिजाइन, भूमिगत और सतह के खुदाई, विशिष्ट समस्याओं के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का प्रयोग र्इत्यादि क्षेत्रों में इन्हे विशेज्ञता प्राप्त है | माह मर्इ, 2014 में र्इन्होने स्थायी संकाय के रूप में में राष्ट्रीय जल अकादमी में योगदान किया |

उपरोक्त के अलावा, र्इन्हे MATLAB, MathCad, Visual Basics, VBA Scripts, सी++, एचटीएमएल / एएसपी / पीएचपी / जावा, डीबीएमएस, Opensees र्इत्यादि विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओं में अच्छी कमांड है |

पनबिजली संयंत्रों के डिजाइन एवं विश्लेषण, संरचनात्मक अभियान्त्रिकी में अनुसंधान, वाटर हैमर एवं मास दोलन (WHAMO), रॉकसार्इंस फेज-2, Staad.Pro, ऑटोकैड सिविल 3डी (Autocad Civil3D), Abaqus एवं Unwedge र्इत्यादि सॉफ्टवेयरों का प्रयोग एवं अनुप्रयोग इनका प्रमुख क्षेत्र है |

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र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, mrathore85@gmail.com





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