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राष्ट्रीय जल अकादमी
उत्कृष्टता के लिए प्रशिक्षण (ट्रेनिंग फॉर एक्सीलेंस)
Ashok Pillar


राष्ट्रीय जल अकादमी में संकाय

राष्ट्रीय जल अकादमी में स्थायी संकाय का चयन केन्द्रीय जल आयोग द्वारा चुनिंदा एवं विशिष्ट केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह-‘क’ अधिकारियों, जिनका उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड, जल संसाधन विकास और प्रबंधन में लंबे व्यावहारिक अनुभव और योग्यता के साथ प्रशिक्षण देने के लिए अच्छा संचार कौशल होना शामिल है, से किया जाता है|

स्थायी संकाय एक मुख्य अभियंता के नेतृत्व में आठ संकाय के रूप में जल विज्ञान एवं जल संसाधन, सिंचाई, जल विद्युत, सामाजिक आर्थिक एवं पर्यावरणीय पहलु तथा तन्त्र अभियान्त्रिकी जैसे विशेष विषयों को आवरित करने के लिए है| राष्ट्रीय जल अकादमी में शामिल स्थायी संकाय केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह-‘क’ वर्ग के अधिकारी है जिन्हे जल के क्षेत्र में पर्याप्त पेशेवर / क्षेत्रिय अनुभव है|

स्थायी संकाय के अलावा, पाठ्यक्रम का समर्थन राष्ट्रीय जल अकादमी द्वारा आमंत्रित अतिथि संकाय द्वारा किया जाता हैं| अतिथि संकाय में प्रमुख अनुसंधान केन्द्रों और भारत के विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों के साथ-साथ अन्य संगठनों / संस्थाओं / विभागों / गैर सरकारी संगठनों में अभ्यासरत पेशेवरों और विशेषज्ञों, जिसमें सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी भी होतें है, को शामिल किया जाता है|

राष्ट्रीय जल अकादमी में स्थायी संकाय

राष्ट्रीय जल अकादमी के स्थायी संकाय में शामिल है:-

योगेश पैठणकर, मुख्य अभियंता

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा के माध्यम से योगेश पैठणकर वर्ष 1990 में केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा (के.ज.अ.सेवा-वर्ग-क) में शामिल हुए| उन्होने वर्ष 1988 में श्री गोविन्दराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी और विज्ञान संस्थान, इंदौर से यांत्रिक अभियांत्रिकी में डिग्री अर्जित की । केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा में अपने पेशेवर जीविका उन्होंने केंद्रीय जल आयोग में विभिन्न पदों पर काम किया है| जल क्षेत्र के विभिन्न आयामों में उनका 28 वर्षों से अधिक का कार्य अनुभव है|

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नियंत्रण बोर्ड निदेशालय में अपने 7 साल के कार्यकाल के दौरान, वह बानसागर और राजघाट अंतरराज्यीय परियोजनाओं के निर्माण और अनुबंध प्रबंधन में शामिल रहे तथा उन्हें अध्यक्ष, केन्द्रीय जल आयोग द्वारा योग्यता प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया|

भोपाल के नर्मदा बेसिन संगठन में अपने 9 साल के कार्यकाल के दौरान विभिन्न पदों पर काम करते हुए उन्होंने मुख़्तलिफ़ अनुभव प्राप्त किया है| अधिशासी अभियंता, नर्मदा मंडल के रूप में वह नर्मदा बेसिन में जलविद्युत निरीक्षण और बाढ़ पूर्वानुमान गतिविधियों में शामिल रहें| उप निदेशक (प्रबोधन एवं मूल्यांकन) के रूप में वे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी जिसमें त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम एवं कमान क्षेत्र विकास व जल प्रबंधन के तहत वित्त पोषित तथा मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के मूल्यांकन भी शामिल थे, के लिए आनी जिम्मेदारी निभार्इ| इस अवधि के दौरान "मध्य प्रदेश में जल संसाधन विकास" नामक पुस्तक नर्मदा बेसिन संगठन, केन्द्रीय जल आयोग, भोपाल द्वारा प्रकाशित की गयी| पुस्तक को वर्ष 2003-04 के लिए केन्द्रीय जल आयोग के लैंड मार्क प्रकाशन के रूप में घोषित किया गया था और आलेखन में अग्रणी व्यक्ति होने के नाते उन्हें जल संसाधन दिवस 2004 के अवसर पर योग्यता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया था|

केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में अभिकल्प (उत्तर एवं पश्चिम) फाटक (उत्तर एवं पश्चिम) निदेशालय में अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान वे पन-यांत्रिक उपस्कर के अभिकल्प में शामिल थे| इस अवधि के दौरान उन्होंने लोहरिनगपाडा के पन-यांत्रिक उपस्करों और राष्ट्रीय थर्मल पावर निगम के तपोवन विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना के विनिर्देश रेखाचित्रों की तैयारी के कार्य को संभाला है|

केंद्रीय जल आयोग नई दिल्ली में रिमोट सेंसिंग निदेशालय में लगभग 10 वर्षों के अपने कार्यकाल के दौरान, वे भारतीय अंतरिक्ष संगठन के तहत राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केन्द्र के सहयोग से "भारत जल संसाधन सूचना प्रणाली - भारत-डब्ल्यूआरआईएस" विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं| भारत-डब्लूआरआईएस एक वेब सक्षम जीआईएस आधारित जल संसाधन सूचना प्रणाली (www.india-wris.nrsc.gov.in) है जिसमें 105 जीआईएस परतें हैं जो भारत के जल संसाधनों की एकीकृत तस्वीर दे रही हैं| भारत के नदी बेसिन एटलस को इस परियोजना के तहत लाया गया था जिसकी काफी सराहना हुई| भारत-डब्लूआरआईएस पोर्टल के विकास के लिए वर्ष 2015 में केन्द्रीय जल आयोग को सीबीआईपी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था| ईएसआरआई इंडिया ने वर्ष 2016 में भारत-डब्लूआरआईएस पोर्टल के विकास के लिए अपने वार्षिक उपयोगकर्ता की बैठक के दौरान जीआईएस (एसएजी) में विशेष उपलब्धि पुरस्कार के साथ केन्द्रीय जल आयोग को सम्मानित किया|

जुलाई 2008 से जुलाई 2012 तक इन्होने सिंचाई और ड्रेनेज पर भारतीय राष्ट्रीय समिति के सदस्य सचिव के रूप में सिंचाई और जल निकासी क्षेत्र में जल संसाधन मंत्रालय की तरफ से अनुसंधान एवं विकास के कार्य समन्वय किया| दिसम्बर, 2009 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित आईसीआईडी की 59वीं आईईसी बैठक और आईसीआईडी के 5 वें एशियाई क्षेत्रीय सम्मेलन जिसमें 200 विदेशी प्रतिभागियों सहित कुल 700 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, को सफलतापूर्वक संगठित करने का कार्य किया|

एक संक्षिप्त अवधि के लिए वह केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय) में मुख्य अभियंता (परियोजना प्रबंधन संगठन) के रूप में प्रधान मंत्री कृषि सिंचार्इ योजना के कार्यां की देखभाल कर रहे थे| दिनांक 6 अगस्त 2018 को उन्होंने मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे के रूप में पदभार संभाला है| वे पहुंच, दृश्यता, व्याप्ती और सभी गतिविधियों की सामग्रीक गहराई के संदर्भ में राष्ट्रीय जल अकादमी के दृष्टिकोण को विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है| वह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों, विशेष रूप से अफ्रीकी और सार्क देशों के प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करने और जल क्षेत्र में नए आयामों का पता लगाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं जहां राष्ट्रीय जल नीति के अनुरूप तथा स्थानीय एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा सके|

संपर्क :

+91-20-24380678 (कार्यालय)
+91-20-24380110 (फ़ैक्स)

ई-मेल : nwa.mah@nic.in, cenwa.mah@nic.in

सुशील कुमार, निदेशक

सुशील कुमार ने वर्ष 1986 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में प्रौद्योगिकी स्नातक किया है| वे वर्ष 1990 में भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के अधीन केन्द्रीय जल आयोग के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी (ग्रुप 'ए') सेवा (CWES-Group ‘A’) में बतौर सहायक निदेशक शामिल हो गए| इन्होने केन्द्रीय जल आयोग, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण, गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग, जल संसाधन मंत्रालय, सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति और राष्ट्रीय जल अकादमी र्इत्यादि के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया है| केन्द्रीय जल आयोग में शामिल होने से पहले उन्होने एक बंदरगाह परियोजना के डिजाइन और निर्माण के बहु-राष्ट्रीय परामर्शक अभियंताओं के साथ काम किया है|

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सुशील कुमार का सिविल अभियान्त्रिकी के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक पेशेवर अनुभव है| केन्द्रीय जल आयोग में उनके अनुभवों में महत्वपूर्ण विश्लेषण और डिजाइन कार्य, जल विज्ञान संबंधी टिप्पणियों, बाढ़ पूर्वानुमान एवं इससे संबंधित मुद्दे, केन्द्रीय योजना स्कीमों के कार्यान्वयन, मानव संसाधन प्रबंधन र्इत्यादि शामिल हैं|

नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण में उन्हे पुनर्वास और पुनर्स्थापन के कार्यान्वयन के लिए योजना की तैयारी, पुनर्वास नीति, पर्यावरण प्रभाव आकलन एवं सरदार सरोवर बहुउद्देशीय परियोजना के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्य की प्रगति की निगरानी के साथ शामिल किया गया था| अलावा इसके, नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण सचिवालय, जहां सीधी भर्ती के साथ प्रतिनियुक्ति के आधार पर भी नियुक्ति होती है, के दिन-प्रतिदिन के प्रशासनिक जरूरतों की देखभाल करते हुए प्रशासन स्कंध इनकी जिम्मेदारियों का एक हिस्सा था|

राष्ट्रीय जल अकादमी में अपने पहले कार्यकाल के दौरान सुशील कुमार ने जल संसाधन विकास और प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम जिसमें महत्वपूर्ण मुद्दों, रचना स्वरूप, बांध सुरक्षा के मुद्दों सहित प्रबंधकीय और संचार कौशल, प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण की तैयारी एवं आयोजन किया था| वे बाढ़ प्रबंधन, रचना स्वरूप, जल विज्ञानीय प्रेक्षण, जल संसाधन प्रबंधन, सामरिक मुद्दों से प्रभावी संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास जैसे विभिन्न विषयों के लिए संकाय भी रह चुके हैं| अलावा इसके, वे राष्ट्रीय जल अकादमी में विश्व बैंक सहायता प्राप्त जल विज्ञान परियोजना-द्वितीय (HP-II) का कार्यान्वयन नियन्त्रित किया है| इन्होने राष्ट्रीय जल अकादमी के निदेशक (प्रशासन एवं समन्वय) का दायित्व भी बखुबी निभायी है|

जल संसाधन मंत्रालय की ब्रह्मपुत्र और बराक स्कंध में वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त के रूप में सुशील कुमार ने परियोजना समन्वय सचिवालय एवं परियोजना समन्वय सचिवालय के लिए तकनीकी सहायता और प्रबंधन परामर्श के कार्यों की देखरेख के साथ-साथ विश्व बैंक सहायता प्राप्त जल विज्ञान परियोजना-द्वितीय के देश भर में विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच क्रियान्वयन की देखरेख भी की है|

'अपने कार्यालय के प्रमुख' के रूप में वडोदरा में सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति सचिवालय चलाने के अलावा सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति में सुशील कुमार ने यूनिट I (बांध और आनुषंगिक कार्य) और यूनिट-III (पन बिजली का कार्य) की प्रगति की निगरानी, गरूड़ेश्वर बॉंध के निर्माण की निगरानी के साथ-साथ इन निर्माण कार्यों से संबंधित किसी भी मुद्दे पर पार्टी राज्यों के मध्य समन्वय स्थापित करने में भी शामिल रहे हैं| पार्टी राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना की लागत के हिस्सेदारी का वितरण अपने समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी उनको उत्तराधिकार के रूप में मिला था| सुशील कुमार ने सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति में अपने कार्यकाल के दौरान लगभग सात महीने के लिए सचिव, सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति एवं विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी भी ली । उनके इस कार्यकाल के दौरान लंबे समय से ठप पड़े बांध निर्माण को फिर से शुरू किया गया था|

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+91-020-24380144(कार्यालय)
+91-9422646384 (मोबार्इल)
+91-020-24380110/24380224(फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, sushilkumar_cwc@yahoo.co.in

एस एन पांडे, निदेशक

श्री एस.एन. पांडे ने जी.बी. पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से सिविल इंजीनियरिंग अभियांत्रिकी में प्रौद्योगिकी में स्नातक संपूर्ण किया| इन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय में भू - तकनीकी अभियांत्रिकी में अभियांत्रिकी-निष्णात संपूर्ण किया| वे केंद्रीय जल अभियांत्रिकी (समूह-ए) सेवाओं के 1993 बैच के अभियांत्रिकी सेवा से संबंध रखते है| केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के अपने पेशेवर जीवन यात्रा में उन्होंने केंद्रीय जल आयोग और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में विभिन्न क्षमताओं में काम किया है| जल क्षेत्र के विभिन्न आयामों में उनका लगभग 24 वर्षों का अनुभव है|

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सहायक निदेशक के रूप में सेवा के अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान इन्होंने जलविद्युत के अनुकूलन के लिए बहुउद्देशीय, बहु-जलाशय सिमुलेशन मॉडलिंग अध्ययनों में योगदान दिया और गणितीय आवश्यकताओं का उपयोग करते हुए संरक्षण की आवश्यकताओं, सिंचाई की आपूर्ति आदि के साथ समझैताकारी समन्वयन स्थापित किया| इन्होने विभिन्न प्रकाशनों जैसे "जलाशयों का वास्तविक समय एकीकृत संचालन", "सूखा – एक प्राकृतिक आपदा", "तिपार्इमुख पनबिजली परियोजना के लिए जलाशय सिमुलेशन अध्ययन, जून 2000” आदि में भी योगदान दिया|

उप निदेशक के रूप में वे उन्नत अभियांत्रिकी / सॉफ्टवेयर टूल्स जैसे सिमुलेशन मॉडल, हाइड्रोलॉजिकल मॉडल, डेटाबेस मॉडल, जीआईएस आदि का उपयोग करके एकीकृत नदी बेसिन योजना और प्रबंधन अध्ययन में शामिल रहे| उन्होंने विभिन्न प्रकार के परियोजनाएं जैसे जल विज्ञान परियोजना चरण -1 के तत्वावधान में नदी बेसिन सिमुलेशन मॉडल “डीएसएस रिबासिम” का उपयोग कर भारत में एकीकृत नदी बेसिन योजना और भारत में गुजरात राज्य के साबरमती बेसिन के प्रबंधन पर प्रदर्शन अध्ययन; जल विज्ञान परियोजना चरण- I के तत्वावधान में साबरमती बेसिन (गुजरात) और ब्राह्मणी बेसिन (उड़ीसा) आदि में अन्न, आबादी एवं पर्यावरण के लिए पानी के उपयोग का आंकलन भी किया|

अधिशासी अभियंता के रूप में इन्होंने सिक्किम अन्वेषण मंडल, केन्द्रीय जल आयोग में काम किया है और जलविद्युत परियोजनाओं के सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्यों को अंजाम दिया है| इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग द्वारा “रंगित जलविद्युत परियोजना चरण IV”, सिक्किम की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी में योगदान दिया| इन्होंने रंगित स्टेज II की पूर्व संभाव्यता रिपोर्ट तैयार करने में भी योगदान दिया| इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय) में अभिकल्प एवं अनुसंधान स्कंध के अंतर्गत उपकरण निदेशालय में उप निदेशक के रूप में भी काम किया|

निदेशक के रूप में वे क्रमशः जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के तकनीकी मूल्यांकन लागत तथा केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय के तकनीकी प्राक्कलन लागत के विचार के लिए बाढ़ नियंत्रण, जल आपूर्ति एवं पनबिजली परियोजनाओं के लागत कार्यों के तकनीकी मूल्यांकन में शामिल रहे|

इन्होंने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में SJC के रूप में काम किया जहां इन्होंने चीन और भूटान के साथ जल संसाधन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय मामले तथा भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में जल-विद्युत विकास से संबंधित मामले, अंतर्राष्ट्रीय कोण विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की मंजूरी, आदि का निपटान किया|

वे सितंबर 2018 को राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे में निदेशक (अभिकल्प) के रूप में शामिल हुए|

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+91-20-24381212(कार्यालय)
+91-9873163630 (मोबार्इल)
+91-020-24380110/24380224(फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in

सुनील कुमार, निदेशक

सुनील कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 1997 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr.’A’) अधिकारी है| इन्होंने एम एस बिरला इंस्टीट्यूट, मेसरा से प्रौद्योगिकी अभियान्त्रिकी (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) स्नातक एवं यूरो एक्वा, जो 5 यूरोपीय विश्वविद्यालय का एक संघ है, से जल सूचना विज्ञान एवं जल प्रबंधन से विज्ञान निष्णात (M.S.) की उपाधि प्राप्त की| अपने निष्णात पाठ्यक्रम की लक्ष्य प्राप्ती हेतु इरास्मस मुन्दुस (Erasmus Mundus) छात्रवृत्ति के लिए यूरोपीय आयोग द्वारा 28 विश्व स्तर पर चयनित छात्रों में एक थे| इन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से परियोजना प्रबंधन (PGCPM) में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र भी किया है|

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इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग के निर्माण मशीनरी कंसल्टेंसी निदेशालय में सहायक निदेशक / उप निदेशक पद पर रहते हुए तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन, जल संसाधन परियोजना हेतु उपकरण नियोजन के दृष्टि से तकनीकी परामर्श एवं संयंत्र निर्माण उपकरण कार्यप्रणाली की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया| इन्होंने इन क्षेत्रों में मानदंडों, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण विकसित करने में अपना योगदान दिया।

जल संसाधन मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास प्रभाग में उप निदेशक के रूप में काम करते हुए इन्होने अनुसंधान और विकास के दिशा-निर्देशों के संकलन, सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से पानी के क्षेत्र में अनुसंधान पर रिपोर्ट (पीपीपी), योजना स्कीम के व्यय के लिए वित्त समिति (ईएफसी) ज्ञापन, जल प्रबंधन के लिए एक एकीकृत रणनीति विकसित करने के लिए मंत्रियों के समूह (जीओएम) को सहायता, भारतीय राष्ट्रीय समितियों और बारीकी से परियोजनात्तर निष्पादन मूल्यांकन अध्ययन, जल उपयोग दक्षता अध्ययन, जल संसाधन मंत्रालय आदि के संगठनों द्वारा किए गए अनुसंधान एवं विकास लिए कार्य के मूल्यांकन र्इत्यादि के रूप में कई अनुसंधान प्रयासों में योगदान दिया है| इसके अलावा पहले निदेशक के रूप में इन्होने 'सतही जल पर भारतीय राष्ट्रीय समिति' (INCSW) की नवगठित सचिवालय जो सिंचाई एवं जलनिस्सारण पर अंर्तराष्ट्रीय आयोग की राष्ट्रीय समिति (आईसीआईडी) भी है, के सभी गतिविधियों को कार्यात्मक बनाया है|

सुनील कुमार की अच्छा अंतरराष्ट्रीय पहुंच है तथा इन्होने वार जलग्रहण क्षेत्र की बाढ़ विश्लेषण, नाइस, फ्रांस (हाइड्रो-यूरोप), अबिंगडॉन (संयुक्त राज्य) के लिए शहरी बाढ़ पूर्वानुमान हेतु प्रारंभिक अध्ययन, विदा नदी, डेनमार्क के मॉडलिंग पर वेब सहयोगात्मक अध्ययन (Hydro-Web) तथा कई अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी / सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग लिया है|

जल संसाधन परियोजना के निर्माण उपकरण पद्धति, जल क्षेत्र में अनुसंधान, जल प्रबंधन के उभरते अवधारणाये, जलसूचना विज्ञान उपकरण जैसे ArcGIS, Mike-11, Mike-She, Mike-21, Mike-Mouse, HEC RAS, HEC HMS, इन्फोवर्कस, CS/RS /2D, न्यूरोसेल, एस्पानेट, Water CAD र्इत्यादि इनके दिलचस्पी के क्षेत्रों में शामिल है|

संपर्क:

+91-020-24380296 (कार्यालय)
+91-020-24380110 (फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in, sunil701@yahoo.com

प्रदीप कुमार, निदेशक

प्रदीप कुमार, निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2000 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr.’A’) अधिकारी है| इन्होंने जुलाई 2003 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में योगदान किया| इन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज, कोटा (अब आरटीयू, कोटा, राजस्थान) से यान्त्रिक अभियान्त्रिकी से स्नातक की उपाधि एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से थर्मल अभियान्त्रिकी से प्रौद्योगिकी निष्णात की उपाधि प्राप्त की है|

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केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नर्इ दिल्ली में अपने कार्यकाल के दौरान इन्होंने प्रगति एवं आयोजना (उत्तर एवं दक्षिण) निदेशालय, सॉफ्टवेयर प्रबंधन निदेशालय, फाटक (उत्तर एवं पश्चिम) निदेशालय एवं निर्माण मशीनरी परामर्श निदेशालय में सहायक निदेशक और उप निदेशक के रूप में काम किया है|

इनके द्वारा संभाले गये कार्यों की प्रकृति में DPR (बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं) के मूल्यांकन के लिए समन्वय एवं टीएसी टिप्पणी की तैयारी, सॉफ्टवेयर / हार्डवेयर की खरीद और प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन एवं प्रबंधन, जल-यान्त्रिक कार्य (हाइड्रोलिक फाटक एवं उत्तोलक) के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की जॉंच, हाइड्रोलिक फाटक, उत्तोलक के विभिन्न प्रकार के तकनीकी विनिर्देश विनिर्माण रेखाचित्रों, जल संसाधन परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले गैन्ट्री क्रेन र्इत्यादि की जॉंच एवं जल संसाधन परियोजनाओं के लिए हाइड्रोलिक फाटक, उत्तोलक के तकनीकी विनिर्देश दस्तावेज़ एवं रेखाचित्रों की तैयारी र्इत्यादि शामिल हैं|

राष्ट्रीय जल अकादमी में इनका कर्तव्य जल संसाधन विकास में सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आरएस / जीआईएस उपकरण आदि के संबंध में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन एवं समन्वय करने से है|

DPR (बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं) का मूल्यांकन, अधोलंब हाइड्रोलिक फाटकों (फिक्स्ड पहिया, स्लाइड), लॉग रोक, यान्त्रिक उत्तोलक, गैन्ट्री क्रेन र्इत्यादि जल यान्त्रिक उपकरणों, जल संसाधन परियोजनाओं के निर्माण उपकरण और संयंत्र के डिजार्इन निर्माण, क्वॉनटम भू सूचना प्रणाली, भौगोलिक संसाधन विश्लेषण समर्थन प्रणाली, सागा (SAGA), HEC RAS, HEC HMS, ऑटोकैड, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, सी, सी ++, Visual C ++, विन्डो प्रोग्रामिंग, डिवाइस ड्राइवर प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेअर का परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण र्इत्यादि जल सूचना विज्ञान उपकरणों के उपयोग के क्षेत्र में इन्हे विशेषज्ञता हासिल है|

संपर्क:

+91-020-24380528 (कार्यालय)
+91-020-24380110 (फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in

सिद्धार्थ मित्रा, निदेशक

सिद्धार्थ मित्रा, निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2002 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr. ‘A’) अधिकारी है| इन्होंने सितंबर, 2004 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में योगदान किये एवं इनकी तैनाती केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, नर्इ दिल्ली में की गयी| इन्होंने यादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता से अभियान्त्रिकी स्नातक (सिविल अभियान्त्रिकी) एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर से परिवहन अभ्यान्त्रिकी में प्रौद्योगिक निष्णात की उपधि प्राप्त की| इन्हे स्नातकोत्तर स्तर पर सिविल अभियान्त्रिकी में समग्र अव्वल होने के लिए रजत पदक से सम्मानित किया गया|

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उप निदेशक (पनबिजली) के रूप में राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे स्थानांतरित किए जाने से पहले जून 2015 तक वे थर्मल सिविल डिजाइन मंडल, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण में तैनात थे| केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, नर्इ दिल्ली में रहते हुए अप्रैल, 2008 इन्हे उप निदेशक के पद पर पदोन्नत किया गया तथा जून, 2016 में इनकी पदोन्नति निदेशक पद पर हो गयी|

थर्मल सिविल डिजाइन मंडल, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, नर्इ दिल्ली में रहते हुए इनक द्वारा संभाले मुख्य कार्य थर्मल पावर परियोजनाओं और प्रसारण लाइनों की डिजाइन एवं अभियान्त्रिकी, जल विद्युत परियोजनाओं के मात्रा आकलन एवं चरणबद्ध सिविल लागत की जॉंच, फ्लाई ऐश उत्पादन की निगरानी एवं देश में उपयोग, पनबिजली परियोजनाओं के भुमिगत बिजलीघर के वैद्युतिक ओवरहेड भारोत्तोलन यंन्त्र के डिजाइन एवं अभियांन्त्रिकी एवं अत्यंत विशाल बिजली परियोजनाओं के जल की उपलब्धता और जल निकासी क्षेत्र के रिपोर्ट की जॉंच रही है|

संपर्क:

+91-020-24380296 (कार्यालय)
+91-020-24380110 (फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in

मनीष राठौर, उप निदेशक

मनीष राठौर, उप निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी एक 2007 बैच के केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा (समूह-ए) (CWES Gr. ‘A’) अधिकारी है| वे जुलार्इ, 2009 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नर्इ दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुये| वे जी.एस. प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर से सिविल अभियान्त्रिकी में अभियान्त्रिकी स्नातक तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई से संरचनात्मक अभियान्त्रिकी में प्रौद्योगिकी निष्णात है|

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इन्हे स्नातक स्तर पर सिविल अभियान्त्रिकी में समग्र अव्वल होने के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया| वर्ष 2009 में सिविल अभियान्त्रिकी में अभियान्त्रिकी निष्णात में समग्र अव्वल होने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुम्बई हेरिटेज फन्ड छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया| इन्होने वर्ष 2012 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से नवोन्मेष और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण फाउंडेशन (FITT) के तहत "भूमिगत संरचनाओं के विश्लेषण एवं डिजाइन" विषय पर 3 क्रेडिट कोर्स तथा "जल विद्युत अभियान्त्रिकी" पर एक 4 क्रेडिट कोर्स में सहभागिता की|

हाइडल सिविल डिजाइन (उत्तर एवं उत्तर-पूर्व) निदेशालय में अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान डिजाइन टीम के एक प्रमुख सदस्य के रूप में इन्होने जल विद्युत परियोजनाओं के विभिन्न घटकों के डिजाइन और अनुकूलन का काम किया है| परियोजना के नक्शा अनुकूलन, विश्लेषण, डिजाइन और जल विद्युत परियोजनाओं के विभिन्न घटकों की विस्तृत परियोजना रिर्पोट / निविदा / निर्माण चरण के रेखांकन में इनका योगदान रहा है| ट्रांसिएंट एनालिसिस, लेआउट ऑप्टिमाइजेशन, प्रेशर शाफ़्ट डिजाइन, बाईफरकेशन पीस डिजाइन, भूमिगत और सतह के खुदाई, विशिष्ट समस्याओं के लिए विशेष सॉफ्टवेयर का प्रयोग र्इत्यादि क्षेत्रों में इन्हे विशेज्ञता प्राप्त है| माह मर्इ, 2014 में र्इन्होने स्थायी संकाय के रूप में में राष्ट्रीय जल अकादमी में योगदान किया|

उपरोक्त के अलावा, र्इन्हे MATLAB, MathCad, Visual Basics, VBA Scripts, सी++, एचटीएमएल / एएसपी / पीएचपी / जावा, डीबीएमएस, Opensees र्इत्यादि विभिन्न प्रोग्रामिंग भाषाओं में अच्छी कमांड है|

पनबिजली संयंत्रों के डिजाइन एवं विश्लेषण, संरचनात्मक अभियान्त्रिकी में अनुसंधान, वाटर हैमर एवं मास दोलन (WHAMO), रॉकसार्इंस फेज-2, Staad.Pro, ऑटोकैड सिविल 3डी (Autocad Civil3D), Abaqus एवं Unwedge र्इत्यादि सॉफ्टवेयरों का प्रयोग एवं अनुप्रयोग इनका प्रमुख क्षेत्र है|

संपर्क:

+91-020-24380528 (कार्यालय)
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जी श्रीनिवासुलु, उप निदेशक

जी श्रीनिवासुलु, उप निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2012 के केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के अधिकारी है| वे मार्च 2014 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुये| वे एसवी विश्वविद्यालय, तिरुपति से (असैनिक अभियांत्रिकी) अभियांत्रिकी स्नातक है तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबर्इ से संरचनात्मक अभियांत्रिकी से प्रौद्योगिकी निष्णात किया है|

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He has been awarded with gold medals for being overall topper in Civil Engineering at Graduate level. He has also been awarded IITBHF इन्होंने वर्ष 2016 में आईआईएससी बैंगलोर में शहरी बाढ़ पर मानसून स्कूल में भाग लिया| वर्ष 2014 में केन्द्रीय जल आयोग में शामिल होने से पहले इन्होंने सड़क और भवन विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार में एक संक्षिप्त अवधि के लिए सहायक कार्यकारी अभियंता के रूप में काम किया और और निर्माण कार्यों के नियोजन, डिजाइन, निविदा और निष्पादन में शामिल रहें हैं|

इन्होंने केंद्रीय जल आयोग (मुख्यालय) के अभिकल्प एवं अनुसंधान स्क्ध में सहायक निदेशक के रूप केन्द्रीय जल आयोग में अपना आजीविका प्रारंभ किया तथा मूल्यांकन, अभिकल्प, योजना एवं तटबंध बांधों के निर्माण चरण के साथ-साथ इनटेक वेल के रेखाचित्रों के तैयारी में शामिल रहें|

बाद में, उन्होंने प्रबोधन (दक्षिण) संगठन, केन्द्रीय जल आयोग, बंगलूरू में 2 साल की अवधि के लिए सहायक निदेशक के रूप में काम किया तथा लघु सिंचाई परियोजनाओं के मूल्यांकन, प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का निरीक्षण, आरएस उपकरण का उपयोग करते हुए पालर बेसिन में जल क्षमता का आकलन, त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम में केंद्रीय सहायता की प्रसंस्करण में प्रमुख भूमिका निभाई है| आहरण एवं संवितरण अधिकारी के क्षमता मे इन्होने ई-निविदाएं / दर संविदा जारी करने तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के पंजीकरण के साथ भी जुड़े रहे|

ई-गवर्नेंस टूल्स जैसे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, ई-ऑफिस, ई-जीईएम, ई-टेंडरिंग लेखा इत्यादि एवं स्थापना संबंधी मामलों पर भी उनकी अच्छी कमान है|

इनके पसंदीदा क्षेत्रों में संरचनात्मक अभियांत्रिकी में अनुसंधान, ई-गवर्नेंस टूल्स जैसे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, ई-जीईएम, ई-ऑफिस, ई-टेंडरिंग इत्यादि, जल प्रबंधन की उभरती अवधारणाएं, हाइड्रो सूचना विज्ञान उपकरण जैसे एआरसीजीआईएस, माइक -11, माइक-शी, माइक -21, माइक-माउस, एचईसी-आरएएस, एचईसी-एचएमएस, इन्फॉर्क्स सीएस / आरएस / 2 डी, न्यूरोशेल, ईपीएएनईटी, वाटर सीएडी इत्यादि शामिल है|

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