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राष्ट्रीय जल अकादमी
उत्कृष्टता के लिए प्रशिक्षण (ट्रेनिंग फॉर एक्सीलेंस)
Ashok Pillar


राष्ट्रीय जल अकादमी

राष्ट्रीय जल अकादमी (जिसे पूर्व में केंद्रीय प्रशिक्षण इकाई के रूप में जाना जाता था) जल संसाधनों के विकास एवं प्रबंधन में शामिल भारत के विभिन्न केन्द्रीय / राज्य संगठनों में कार्यरत अभियंताओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केन्द्रीय जल आयोग में वर्ष 1988 में स्थापित किया गया था | यह अंतर्राष्ट्रीय विकास के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका एजेंसी (United States Agency for International Development, USAID) द्वारा सहायता के तहत स्थापित किया गया था और बाद में विश्व बैंक से प्राप्त सहायता के साथ सशक्त किया गया |

राष्ट्रीय जल अकादमी की परिकल्पना जल संसाधन कर्मियों के प्रशिक्षण में एक "उत्कृष्टता के केंद्र" के रूप में कार्य करने के लिए की गई है | यहाँ राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के जल संसाधन अभियंताओ को योजना, डिजाइन, मूल्यांकन, निर्माण, संचालन / प्रबंधन और जल संसाधन परियोजनाओं की निगरानी के क्षेत्र में व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकताओं को परिपूर्ण किया है | अपनी राष्ट्रीय भूमिका में राष्ट्रीय जल अकादमी विशेष और उभरते इलाको के सभी जल क्षेत्र के कर्मियों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के संचालन पर ध्यान केंद्रित कर रही है जिसके लिए राज्य के जल संसाधन विभाग या अन्य संस्थान पर्याप्त रूप से सज्जित नहीं हैं, | इसके अलावा, यह केन्द्रीय जल आयोग, अन्य केंद्रीय और राज्य संगठनों के लिए जल क्षेत्र के सभी प्रासंगिक क्षेत्रों में प्रेरण और पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का आयोजन करती है |

राष्ट्रीय जल अकादमी के नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिभागियों, केन्द्रीय / राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी कंपनियों, व्यक्तियों और विदेशी नागरिकों के लिए भी भुगतान के आधार पर खुले हैं | अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें |

उद्देश्य और भूमिकाये

राष्ट्रीय जल अकादमी की परिकल्पना जल संसाधन अभियान्त्रिक कार्मिकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण के लिए 'उत्कृष्टता के केंद्र' के रूप में कार्य करने के लिए की गई है | राष्ट्रीय जल अकादमी का व्यापक उद्देश्य इस प्रकार है :


  • केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों के लिए विशेष पाठ्यक्रम का आयोजन |
  • केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों (मुख्य अभियंता / प्रमुख अभियंता / सचिव) के लाभ के लिए जल संसाधन विकास / विशेष क्षेत्रों के प्रमुख मुद्दों पर राष्ट्रीय / क्षेत्रीय सेमिनार एवं कार्यशालाओं की व्यवस्था करना |
  • केन्द्र और राज्य सरकार संगठनों और उनके प्रशिक्षण संस्थानों को उनकी विशिष्ट प्रशिक्षण की आश्यकता पर सहायता प्रदान करना |
  • भारत में अग्रणी संस्थानों और विदेशों में जल संसाधन क्षेत्र में प्रशिक्षण से संबंधित गतिविधियों के कार्यान्वन के साथ विशेषज्ञता साझा करने के लिए संबंधों को बनाए रखना और विकसित करना |
  • संरचनात्मक विश्लेषण और डिजाइन के उन्नत तरीकों से प्रशिक्षण का संचालन करना |
  • जल संसाधनों में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) जैसे नए उभरते प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण मॉड्यूल / व्यष्टि अध्ययन का विकास एवं प्रयोग करना |
  • केंद्रीय जल अभियान्त्रिकी (समूह 'क') सेवाओं के नव नियुक्त सहायक निदेशकों / सहायक कार्यकारी अभियंताओं के लिए प्रवेशण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना |
  • केंद्रीय जल आयोग के नवनियुक्त / समूह 'ख' में पदोन्नत अभियान्त्रिकी अधिकारियों के लिए प्रवेशण / उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करना |
  • केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवाओं के समूह 'ख' से समूह 'क' में पदोन्नत अधिकारियों के लिए पुन: अभिविन्यास पाठ्यक्रम का आयोजन करना
  • राज्य जल संसाधन विभाग / केंद्रीय एजेंसियों के नवनियुक्त समूह 'ख' / समूह 'क' के अधिकारियों के लिए उनके अनुरोध पर प्रवेशण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना जहां इस तरह के प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं |

संगठनात्मक संरचना

राष्ट्रीय जल अकादमी एक मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एवं आठ स्थायी संकायों की एक संरचना है | स्थायी संकाय में केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह 'क' (CWES-Group ‘A’) के वे अधिकारी शामिल है, जिन्हें जल संसाधन विकास और प्रबंधन में लंबे समय तक का अनुभव है | अतिथि संकाय में भारत में श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों और प्रमुख अनुसंधान केन्द्रों के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों के साथ- साथ अन्य संगठनों और एजेंसियों के अभ्यासरत पेशेवरों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाता है |





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