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राष्ट्रीय जल अकादमी
उत्कृष्टता के लिए प्रशिक्षण (ट्रेनिंग फॉर एक्सीलेंस)
Ashok Pillar


राष्ट्रीय जल अकादमी में संकाय

राष्ट्रीय जल अकादमी में स्थायी संकाय का चयन केन्द्रीय जल आयोग द्वारा चुनिंदा एवं विशिष्ट केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह-‘क’ अधिकारियों, जिनका उत्कृष्ट शैक्षणिक रिकॉर्ड, जल संसाधन विकास और प्रबंधन में लंबे व्यावहारिक अनुभव और योग्यता के साथ प्रशिक्षण देने के लिए अच्छा संचार कौशल होना शामिल है, से किया जाता है|

स्थायी संकाय एक मुख्य अभियंता के नेतृत्व में आठ संकाय के रूप में जल विज्ञान एवं जल संसाधन, सिंचाई, जल विद्युत, सामाजिक आर्थिक एवं पर्यावरणीय पहलु तथा तन्त्र अभियान्त्रिकी जैसे विशेष विषयों को आवरित करने के लिए है| राष्ट्रीय जल अकादमी में शामिल स्थायी संकाय केन्द्रीय जल अभियान्त्रिकी सेवा समूह-‘क’ वर्ग के अधिकारी है जिन्हे जल के क्षेत्र में पर्याप्त पेशेवर / क्षेत्रिय अनुभव है|

स्थायी संकाय के अलावा, पाठ्यक्रम का समर्थन राष्ट्रीय जल अकादमी द्वारा आमंत्रित अतिथि संकाय द्वारा किया जाता हैं| अतिथि संकाय में प्रमुख अनुसंधान केन्द्रों और भारत के विश्वविद्यालयों के शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों के साथ-साथ अन्य संगठनों / संस्थाओं / विभागों / गैर सरकारी संगठनों में अभ्यासरत पेशेवरों और विशेषज्ञों, जिसमें सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी भी होतें है, को शामिल किया जाता है|

राष्ट्रीय जल अकादमी में स्थायी संकाय

राष्ट्रीय जल अकादमी के स्थायी संकाय में शामिल है:-

योगेश पैठणकर, मुख्य अभियंता

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा के माध्यम से योगेश पैठणकर वर्ष 1990 में केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा (के.ज.अ.सेवा-वर्ग-क) में शामिल हुए| उन्होने वर्ष 1988 में श्री गोविन्दराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी और विज्ञान संस्थान, इंदौर से यांत्रिक अभियांत्रिकी में डिग्री अर्जित की । केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा में अपने पेशेवर जीविका उन्होंने केंद्रीय जल आयोग में विभिन्न पदों पर काम किया है| जल क्षेत्र के विभिन्न आयामों में उनका 28 वर्षों से अधिक का कार्य अनुभव है|

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नियंत्रण बोर्ड निदेशालय में अपने 7 साल के कार्यकाल के दौरान, वह बानसागर और राजघाट अंतरराज्यीय परियोजनाओं के निर्माण और अनुबंध प्रबंधन में शामिल रहे तथा उन्हें अध्यक्ष, केन्द्रीय जल आयोग द्वारा योग्यता प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया|

भोपाल के नर्मदा बेसिन संगठन में अपने 9 साल के कार्यकाल के दौरान विभिन्न पदों पर काम करते हुए उन्होंने मुख़्तलिफ़ अनुभव प्राप्त किया है| अधिशासी अभियंता, नर्मदा मंडल के रूप में वह नर्मदा बेसिन में जलविद्युत निरीक्षण और बाढ़ पूर्वानुमान गतिविधियों में शामिल रहें| उप निदेशक (प्रबोधन एवं मूल्यांकन) के रूप में वे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी जिसमें त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम एवं कमान क्षेत्र विकास व जल प्रबंधन के तहत वित्त पोषित तथा मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के मूल्यांकन भी शामिल थे, के लिए आनी जिम्मेदारी निभार्इ| इस अवधि के दौरान "मध्य प्रदेश में जल संसाधन विकास" नामक पुस्तक नर्मदा बेसिन संगठन, केन्द्रीय जल आयोग, भोपाल द्वारा प्रकाशित की गयी| पुस्तक को वर्ष 2003-04 के लिए केन्द्रीय जल आयोग के लैंड मार्क प्रकाशन के रूप में घोषित किया गया था और आलेखन में अग्रणी व्यक्ति होने के नाते उन्हें जल संसाधन दिवस 2004 के अवसर पर योग्यता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया था|

केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में अभिकल्प (उत्तर एवं पश्चिम) फाटक (उत्तर एवं पश्चिम) निदेशालय में अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान वे पन-यांत्रिक उपस्कर के अभिकल्प में शामिल थे| इस अवधि के दौरान उन्होंने लोहरिनगपाडा के पन-यांत्रिक उपस्करों और राष्ट्रीय थर्मल पावर निगम के तपोवन विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना के विनिर्देश रेखाचित्रों की तैयारी के कार्य को संभाला है|

केंद्रीय जल आयोग नई दिल्ली में रिमोट सेंसिंग निदेशालय में लगभग 10 वर्षों के अपने कार्यकाल के दौरान, वे भारतीय अंतरिक्ष संगठन के तहत राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केन्द्र के सहयोग से "भारत जल संसाधन सूचना प्रणाली - भारत-डब्ल्यूआरआईएस" विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं| भारत-डब्लूआरआईएस एक वेब सक्षम जीआईएस आधारित जल संसाधन सूचना प्रणाली (www.india-wris.nrsc.gov.in) है जिसमें 105 जीआईएस परतें हैं जो भारत के जल संसाधनों की एकीकृत तस्वीर दे रही हैं| भारत के नदी बेसिन एटलस को इस परियोजना के तहत लाया गया था जिसकी काफी सराहना हुई| भारत-डब्लूआरआईएस पोर्टल के विकास के लिए वर्ष 2015 में केन्द्रीय जल आयोग को सीबीआईपी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था| ईएसआरआई इंडिया ने वर्ष 2016 में भारत-डब्लूआरआईएस पोर्टल के विकास के लिए अपने वार्षिक उपयोगकर्ता की बैठक के दौरान जीआईएस (एसएजी) में विशेष उपलब्धि पुरस्कार के साथ केन्द्रीय जल आयोग को सम्मानित किया|

जुलाई 2008 से जुलाई 2012 तक इन्होने सिंचाई और ड्रेनेज पर भारतीय राष्ट्रीय समिति के सदस्य सचिव के रूप में सिंचाई और जल निकासी क्षेत्र में जल संसाधन मंत्रालय की तरफ से अनुसंधान एवं विकास के कार्य समन्वय किया| दिसम्बर, 2009 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित आईसीआईडी की 59वीं आईईसी बैठक और आईसीआईडी के 5 वें एशियाई क्षेत्रीय सम्मेलन जिसमें 200 विदेशी प्रतिभागियों सहित कुल 700 प्रतिभागियों ने भाग लिया था, को सफलतापूर्वक संगठित करने का कार्य किया|

एक संक्षिप्त अवधि के लिए वह केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय) में मुख्य अभियंता (परियोजना प्रबंधन संगठन) के रूप में प्रधान मंत्री कृषि सिंचार्इ योजना के कार्यां की देखभाल कर रहे थे| दिनांक 6 अगस्त 2018 को उन्होंने मुख्य अभियंता, राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे के रूप में पदभार संभाला है| वे पहुंच, दृश्यता, व्याप्ती और सभी गतिविधियों की सामग्रीक गहराई के संदर्भ में राष्ट्रीय जल अकादमी के दृष्टिकोण को विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है| वह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों, विशेष रूप से अफ्रीकी और सार्क देशों के प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करने और जल क्षेत्र में नए आयामों का पता लगाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं जहां राष्ट्रीय जल नीति के अनुरूप तथा स्थानीय एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा सके|

संपर्क :

+91-20-24380678 (कार्यालय)
+91-20-24380110 (फ़ैक्स)

ई-मेल : nwa.mah@nic.in, cenwa.mah@nic.in

एस एन पांडे, निदेशक

श्री एस.एन. पांडे ने जी.बी. पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से सिविल इंजीनियरिंग अभियांत्रिकी में प्रौद्योगिकी में स्नातक संपूर्ण किया| इन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय में भू - तकनीकी अभियांत्रिकी में अभियांत्रिकी-निष्णात संपूर्ण किया| वे केंद्रीय जल अभियांत्रिकी (समूह-ए) सेवाओं के 1993 बैच के अभियांत्रिकी सेवा से संबंध रखते है| केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के अपने पेशेवर जीवन यात्रा में उन्होंने केंद्रीय जल आयोग और जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में विभिन्न क्षमताओं में काम किया है| जल क्षेत्र के विभिन्न आयामों में उनका लगभग 24 वर्षों का अनुभव है|

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सहायक निदेशक के रूप में सेवा के अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान इन्होंने जलविद्युत के अनुकूलन के लिए बहुउद्देशीय, बहु-जलाशय सिमुलेशन मॉडलिंग अध्ययनों में योगदान दिया और गणितीय आवश्यकताओं का उपयोग करते हुए संरक्षण की आवश्यकताओं, सिंचाई की आपूर्ति आदि के साथ समझैताकारी समन्वयन स्थापित किया| इन्होने विभिन्न प्रकाशनों जैसे "जलाशयों का वास्तविक समय एकीकृत संचालन", "सूखा – एक प्राकृतिक आपदा", "तिपार्इमुख पनबिजली परियोजना के लिए जलाशय सिमुलेशन अध्ययन, जून 2000” आदि में भी योगदान दिया|

उप निदेशक के रूप में वे उन्नत अभियांत्रिकी / सॉफ्टवेयर टूल्स जैसे सिमुलेशन मॉडल, हाइड्रोलॉजिकल मॉडल, डेटाबेस मॉडल, जीआईएस आदि का उपयोग करके एकीकृत नदी बेसिन योजना और प्रबंधन अध्ययन में शामिल रहे| उन्होंने विभिन्न प्रकार के परियोजनाएं जैसे जल विज्ञान परियोजना चरण -1 के तत्वावधान में नदी बेसिन सिमुलेशन मॉडल “डीएसएस रिबासिम” का उपयोग कर भारत में एकीकृत नदी बेसिन योजना और भारत में गुजरात राज्य के साबरमती बेसिन के प्रबंधन पर प्रदर्शन अध्ययन; जल विज्ञान परियोजना चरण- I के तत्वावधान में साबरमती बेसिन (गुजरात) और ब्राह्मणी बेसिन (उड़ीसा) आदि में अन्न, आबादी एवं पर्यावरण के लिए पानी के उपयोग का आंकलन भी किया|

अधिशासी अभियंता के रूप में इन्होंने सिक्किम अन्वेषण मंडल, केन्द्रीय जल आयोग में काम किया है और जलविद्युत परियोजनाओं के सर्वेक्षण और अन्वेषण कार्यों को अंजाम दिया है| इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग द्वारा “रंगित जलविद्युत परियोजना चरण IV”, सिक्किम की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की तैयारी में योगदान दिया| इन्होंने रंगित स्टेज II की पूर्व संभाव्यता रिपोर्ट तैयार करने में भी योगदान दिया| इन्होंने केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय) में अभिकल्प एवं अनुसंधान स्कंध के अंतर्गत उपकरण निदेशालय में उप निदेशक के रूप में भी काम किया|

निदेशक के रूप में वे क्रमशः जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के तकनीकी मूल्यांकन लागत तथा केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय के तकनीकी प्राक्कलन लागत के विचार के लिए बाढ़ नियंत्रण, जल आपूर्ति एवं पनबिजली परियोजनाओं के लागत कार्यों के तकनीकी मूल्यांकन में शामिल रहे|

इन्होंने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में SJC के रूप में काम किया जहां इन्होंने चीन और भूटान के साथ जल संसाधन के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय मामले तथा भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में जल-विद्युत विकास से संबंधित मामले, अंतर्राष्ट्रीय कोण विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की मंजूरी, आदि का निपटान किया|

वे सितंबर 2018 को राष्ट्रीय जल अकादमी, पुणे में निदेशक (अभिकल्प) के रूप में शामिल हुए|

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+91-20-24381212(कार्यालय)
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+91-020-24380110/24380224(फैक्स)

र्इ-मेल: nwa.mah@nic.in

एस.पी.सिंह, उप निदेशक

श्री एस.पी सिंह केंद्रीय जल अभियांत्रिकी (समूह 'ए') सेवाओं के अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा, 2008 बैच से संबंधित हैं | इन्होने बापूजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, झांसी से वर्ष 2003 में असैनिक अभियांत्रिकी में प्रौद्योगिकी स्नातक पूरा किया तथा वर्ष 2005 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से हाइड्रोलिक्स और जल संसाधन अभियांत्रिकी में प्रौद्योगिकी निष्णात की |

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इन्होने ओएनजीसी के मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड में रिफाइनरी के तीसरे चरण के विस्तार परियोजना में 2006 से 2011 तक अभियंता (परियोजना) के रूप में काम किया | वहां वे परियोजना प्रबंधन से संबंधित कार्यों के साथ-साथ स्थल सर्वेक्षण, मृदा की जांच, स्थल ग्रेडिंग और पूरी परियोजना के बुनियादी ढांचे के विकास कार्य और क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (सीडीयू) और डिलेड कोकर यूनिट (डीसीयू) के असैनिक और संरचनात्मक हिस्से के निर्माण में शामिल रहे |

2011 में केंद्रीय जल आयोग में शामिल होने के बाद उन्हें केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के थर्मल असैनिक अभिकल्प (टीसीडी) मंडल में तैनात किया गया था | वहां वे इलेक्ट्रिक सब-स्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइन टावरों के उपकरण नींव के अभिकल्प में शामिल थे | वे आगामी अल्ट्रा मेगा पावर प्लांटों के स्थल चयन और ताप विद्युत परियोजनाओं के लिए मॉडल निविदा दस्तावेज तैयार करने में भी शामिल रहे हैं |

2015 में उप निदेशक के रूप में पदोन्नति के बाद, उन्हें फिर से सीईए के टीसीडी डिवीजन में तैनात किया गया, जहां उन्होंने भारत में सभी थर्मल पावर प्लांटों के फ्लाई ऐश उत्पादन की निगरानी के साथ-साथ थर्मल पावर प्लांटों के आरसीई के आकलन के लिए काम किया | उन्हें वर्ष 2016 में केंद्रीय जल आयोग, लखनऊ के प्रबोधन एवं मूल्यांकन निदेशालय में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां वे जल शक्ति मंत्रालय के तहत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के विभिन्न योजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित परियोजनाओं के मूल्यांकन में शामिल रहें | वह सरयू नहर परियोजना (राष्ट्रीय परियोजना) और बाणसागर नहर परियोजना की निगरानी में भी शामिल रहे

वे जनवरी, 2020 में राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में उप निदेशक के रूप में शामिल हुए ।

उन्होंने स्थायी संकाय के रूप में जून, 2017 में राष्ट्रीय जल अकादमी में शामिल हो गये है | उनकी रुचि के क्षेत्रों में जलविद्युत संयंत्रों के विभिन्न घटकों का विश्लेषण एवं अभिकल्प तथा जल संसाधन परियोजनाओं की सर्वेक्षण एवं अन्वेषण / विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करना शामिल है |

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+91-20-24380392 Ext-33 (कार्यालय)
+91-20-24380110 (फैक्स)
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ई-मेल: satyendra-cwc@gov.in,satyenps@gmail.com

चैतन्य के. एस., उप निदेशक

श्री चैतन्य के एस. ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से असैनिक अभियांत्रिकी में प्रौद्योगिकी स्नातक पूरा किया | वे केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा (समूह ‘क') के अभियांत्रिकी सेवा परीक्षा 2011 बैच के हैं | वे जनवरी 2013 में केंद्रीय जल आयोग (केजआ) में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुए | केन्द्रीय जल आयोग में शामिल होने से पहले, उन्होंने 3 साल के लिए हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (एचएमडब्ल्यूएसएसबी) में प्रबंधक (अभियांत्रिकी) के रूप में काम किया।

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अंतर-राज्यीय मामलों के निदेशालय, केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में, वे अंतर-राज्यीय दृष्टीकोण से प्रायद्वीपीय नदी घाटियों से संबंधित प्रमुख और मध्यम सिंचाई तथा बहुउद्देशीय परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट / परियोजना व्यवहार्यता रिपोर्ट के मूल्यांकन में शामिल रहे, कावेरी पर्यवेक्षी समिति की सहायता की, बभली बैराज पर पर्यवेक्षी समिति और महानदी नदी जल बंटवारे पर वार्ता समिति में शामिल रहे | वे भारत में अंतर-राज्यीय नदियों पर समझौतों पर केन्द्रीय जल आयोग के प्रकाशन 'भारत में नदियों पर कानूनी उपकरण- खंड III' जो अपनी तरह का केवल एक संकलन है, के अद्यतनीकरण में भी शामिल रहे |

अंतर-राज्यीय मामलें-2 निदेशालय, केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में उप निदेशक के रूप में, वे गंगा में थर्मल और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए प्रमुख और मध्यम सिंचाई, बहुउद्देशीय परियोजनाओं, जल-विद्यूत परियोजनाओं और जल आपूर्ति प्रस्तावों के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट / परियोजना व्यवहार्यता रिपोर्ट के मूल्यांकन में यामिल रहे, सिंधु और ब्रह्मपुत्र घाटियों के अंतर-राज्यीय दृष्टिकोण से, जल क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग से संबंधित मामलों, रावी-ब्यास जल के बंटवारे के संबंध में विभिन्न अंतर्राज्यीय बैठकें आयोजित करने और तिलैया धाधर से संबंधित विवाद पर वार्ता समिति योजना में सहायता प्रदान कीजल प्रबंधन निदेशालय, केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में उप निदेशक के रूप में, वे भारत में जलाशय की सजीव भंडारण क्षमता पर साप्ताहिक बुलेटिन तैयार करने में शामिल थे तथा फसल मौसम निगरानी समूह (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजी) / सूखा प्रबंधन के लिए फसल मौसम निगरानी समूह सीडब्ल्यूडब्ल्यूजीडीएम) की बैठकों में भाग लिया | उन्होंने केन्द्रीय जल आयोग - जलाशय भंडारण निगरानी प्रणाली (आरएसएमएस) के तहत अधिक संख्या में जलाशयों को शामिल करने के लिए एक रोड मैप तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जल प्रबंधन निदेशालय, केन्द्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में उप निदेशक के रूप में, वे भारत में जलाशय की सजीव भंडारण क्षमता पर साप्ताहिक बुलेटिन तैयार करने में शामिल थे तथा फसल मौसम निगरानी समूह (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजी) / सूखा प्रबंधन के लिए फसल मौसम निगरानी समूह सीडब्ल्यूडब्ल्यूजीडीएम) की बैठकों में भाग लिया | उन्होंने केन्द्रीय जल आयोग - जलाशय भंडारण निगरानी प्रणाली (आरएसएमएस) के तहत अधिक संख्या में जलाशयों को शामिल करने के लिए एक रोड मैप तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है |

नियमित कार्यों के अलावा, उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भारत जल सप्ताह (IWW) के दो संस्करणों में और अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई और जल निकासी आयोग (ICID) द्वारा सितंबर 2019 में बाली, इंडोनेशिया में आयोजित तीसरे विश्व सिंचाई मंच में जल नीति से संबंधित मामलों पर पेपर प्रस्तुतियाँ दीं | उन्होंने दो पत्रों जैसे, 'भारत में सतत जल संसाधन प्रबंधन के लिए कुशल और उत्पादक उपयोग' (तीसरा विश्व सिंचाई मंच, सितंबर 2019) और 'सतत जल प्रबंधन के लिए नीति हस्तक्षेप और संस्थागत सुधार। ' (सतत जल प्रबंधन पर दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, नवंबर 2019) का सह-लेखन भी किया है |

वे अक्टूबर 2020 में राष्ट्रीय जल अकादमी (एनडब्ल्यूए), केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में उप निदेशक के रूप में शामिल हुए | उनके रुचि के क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का रिमोट सेंसिंग, भू-स्थानिक विश्लेषण, जल नीति से संबंधित मामले, एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, जल संबंधी संघर्षों का सीमापार सहयोग और प्रबंधन शामिल है |

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+91-20-24380392 Ext-33 (कार्यालय)
+91-20-24380110 (फैक्स)
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ई-मेल: chaitanyaks-cwc@gov.in,ksc.iitd@gmail.com

जी श्रीनिवासुलु, उप निदेशक

जी श्रीनिवासुलु, उप निदेशक, राष्ट्रीय जल अकादमी 2012 के केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के अधिकारी है| वे मार्च 2014 में केन्द्रीय जल आयोग (मुख्यालय), नई दिल्ली में सहायक निदेशक के रूप में शामिल हुये| वे एसवी विश्वविद्यालय, तिरुपति से (सिविल अभियांत्रिकी) अभियांत्रिकी स्नातक है तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबर्इ से संरचनात्मक अभियांत्रिकी से प्रौद्योगिकी निष्णात किया है|

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इन्होंने वर्ष 2016 में आईआईएससी बैंगलोर में शहरी बाढ़ पर मानसून स्कूल में भाग लिया| वर्ष 2014 में केन्द्रीय जल आयोग में शामिल होने से पहले इन्होंने सड़क और भवन विभाग, आंध्र प्रदेश सरकार में एक संक्षिप्त अवधि के लिए सहायक कार्यकारी अभियंता के रूप में काम किया और और निर्माण कार्यों के नियोजन, डिजाइन, निविदा और निष्पादन में शामिल रहें हैं|

इन्होंने केंद्रीय जल आयोग (मुख्यालय) के अभिकल्प एवं अनुसंधान स्क्ध में सहायक निदेशक के रूप केन्द्रीय जल आयोग में अपना आजीविका प्रारंभ किया तथा मूल्यांकन, अभिकल्प, योजना एवं तटबंध बांधों के निर्माण चरण के साथ-साथ इनटेक वेल के रेखाचित्रों के तैयारी में शामिल रहें|

बाद में, उन्होंने प्रबोधन (दक्षिण) संगठन, केन्द्रीय जल आयोग, बंगलूरू में 2 साल की अवधि के लिए सहायक निदेशक के रूप में काम किया तथा लघु सिंचाई परियोजनाओं के मूल्यांकन, प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का निरीक्षण, आरएस उपकरण का उपयोग करते हुए पालर बेसिन में जल क्षमता का आकलन, त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम में केंद्रीय सहायता की प्रसंस्करण में प्रमुख भूमिका निभाई है| आहरण एवं संवितरण अधिकारी के क्षमता मे इन्होने ई-निविदाएं / दर संविदा जारी करने तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के पंजीकरण के साथ भी जुड़े रहे|

ई-गवर्नेंस टूल्स जैसे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, ई-ऑफिस, ई-जीईएम, ई-टेंडरिंग लेखा इत्यादि एवं स्थापना संबंधी मामलों पर भी उनकी अच्छी कमान है|

इनके पसंदीदा क्षेत्रों में संरचनात्मक अभियांत्रिकी में अनुसंधान, ई-गवर्नेंस टूल्स जैसे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, ई-जीईएम, ई-ऑफिस, ई-टेंडरिंग इत्यादि, जल प्रबंधन की उभरती अवधारणाएं, हाइड्रो सूचना विज्ञान उपकरण जैसे एआरसीजीआईएस, माइक -11, माइक-शी, माइक -21, माइक-माउस, एचईसी-आरएएस, एचईसी-एचएमएस, इन्फॉर्क्स सीएस / आरएस / 2 डी, न्यूरोशेल, ईपीएएनईटी, वाटर सीएडी इत्यादि शामिल है|

संपर्क:

+91-20-24380476(कार्यालय)
+91-20-24380110(फैक्स)
+91-99113-40729(मोबाइल)

ई-मेल: nwa.mah@nic.in, srinivasuluga@gmail.com, श्रीनिवास- cwc@gov.in

संबंधित लिंक

india.gov.in india.gov.in MoWR,RD&GR Central Water Commission